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आध्यात्मिक लोगों की मुख्य सात विशेषताएँ

आज कल के समय में आध्यात्मिकता के बारे में खूब बातें होती है, एक तरीके से यह शब्द आम बोल चाल की शब्दावली में सम्मिलित हो गया है | बहुत सारे लोग स्वयं के आध्यात्मिक होने का दावा करते हैं | जो लोग शारीरिक व्यायाम योगाभ्यास करते हैं या कुछ समय किसी के कहने पर आँखें बंद कर ध्यान में बैठ जाते हैं या कुछ पुस्तकें पढ़ लेते हैं, वो लोग भी अपने आपको आध्यात्मिक मानते हैं | हमारे चारों तरफ बहुत सारे शिक्षक हैं, ज्ञान देने वाले विद्वान हैं जो अपने आपको उच्च स्तर पर मानते हैं | आध्यात्मिकता पर बहुत सारी किताबें पढ़ लेने से लोगों को प्रक्रियायों, शब्दों, नियमों का ज्ञान हो जाता है | कुछ विशेष साधनाएँ करने पर कुछ लोग सिद्धि भी प्राप्त कर लेते हैं, ऐसे सभी लोग आध्यात्मिक समझे जाते हैं | वास्तव में आध्यात्मिकता सिर्फ बातों के बारे में नहीं हैं | यह दिखावा भी नहीं होता है | और इसकी गहराई को नापने के लिए हमारे पास कोई पैमाना उपलब्ध नहीं है | हाँ, कोई विशिष्ट उच्च श्रेणी के अगर गुरु के सान्निध्य में जाएँ, तब उनसे कुछ छुपा नहीं रहता है | उनकी आंतरिक दृष्टि सब कुछ माप लेती है, लेकिन ऐसे गुरु का मिलना थोड़ा मुश्...

आध्यात्मिकता के पीछे की मुख्य वजहें

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  What Is Spirituality? आज कल आध्यात्मिकता शब्द अक्सर सुनने के लिए मिल जाता है | इन्टरनेट ने जिस तरह से दुनिया के सारे व्यक्तियों को जोर दिया है, अब आध्यात्मिक साधनाओं के बारे में बहुत सारी जानकारी आसानी से हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध है, जो पहले सिर्फ गुरु-शिष्य तक सीमित हुआ करता था | महान गुरूओं की शिक्षा विडियो, ऑडियो या आर्टिकल के रूप में इन्टरनेट पर मिल जाती है | हम बहुत ही भाग्यशाली हैं जो ऐसे युग में जीवन जी रहे हैं, जहाँ हमें उन गुरूओं की वाणी भी सुनने के लिए मिल जाती है जो अब शरीर त्याग कर चुके हैं |   जो अभी सशरीर उपस्थित हैं, वो आम जनता के साथ अपनी शिक्षा को साझा कर रहे हैं, लोगों की शंकाओं का निवारण कर रहे हैं, मार्गदर्शन कर रहे हैं और लोगों के चैतन्य को ऊपर उठा रहे हैं | Benefits Of Spirituality अधिकतर लोग “योग” को ही आध्यात्मिकता समझ लेते हैं और सिर्फ व्यायाम करना और कुछ देर आँखें बंद करके बैठ जाना, उनके लिए पर्याप्त आध्यात्मिक साधना होती है | और बहुत सारे शिक्षक इतना ही कहते हैं, इससे स्वास्थ्य लाभ होता है | अगर आप गूगल करेंगे तो भी आपको आध्यात्मिकता का पहला लाभ स्...

आध्यात्मिकता क्या है ?

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जब कभी भी हम “आध्यात्मिकता” शब्द सुनते है तो यही सोचते है की एक ऐसा इंसान जो जंगलों में घूमता हो, अपना समय पूजा और ध्यान में बिताता हो | हम सबके दिमाग में एक पहले से बनाई हुई अवधारणा है कि  आध्यात्मिक होने का मतलब घर बार छोड़ कर सन्यासी बन जाना है, सामाजिक जिम्मेवारियों से दूर भागना है, अगर आप अपनी इच्छा आध्यामित्कता में दिखायेंगे तो घर, परिवार के लोग आपको उस दिशा में बढ़ने से रोकने की हरसंभव कोशिश करेंगे | समझदारी में यही सबसे बड़ी कमी है | कोई इस सांसारिक दुनिया में रह कर भी आध्यात्मिक हो सकता है | आध्यात्मिक साधनाओं को करते हुए भी, कोई सामाजिक रूप से और ज्यादा जिम्मेवार हो सकता है | बहुत सारे लोगों ने अलग-अलग समय पर आध्यात्मिकता को परिभाषित किया है| मैत्रेय दादाश्रीजी ने बहुत ही आसान शब्दों में बताया –‘स्वाभाविक होना ही आध्यात्मिक होना है|” वो कहते हैं कि आध्यात्मिकता ‘सरल’ शब्द से भी अधिक सरल है | जब मैंने गहराई में जा कर इसे समझने की कोशिश की तब मैंने इसे और अच्छे तरीके से आंतरिक स्तर पर समझा | मैंने पाया यह हमारी आंतरिक दुनिया से सम्बंधित है | यह बाहरी पहनावे से, ध्यान और नियम क...

परिवर्तन समय की जरुरत

  जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, हमें कुछ कमी दिखाई देती है | किसी से बात करते हैं और कोई दिल खोल बात करता है, हमें उनके जीवन में दुःख दिखता है, निराशा दिखती है | कोई रिश्तों में उलझा हुआ है, कोई किसी वजह से दुःख में हैं, कोई पुरानी बातों का गाँठ

उम्मीद

  हे कृष्ण अब तुम्हारा विरह मुझे पीड़ा नहीं देता रातों को नहीं जगाता प्रेम में कमी नहीं फिर भी आँसुओं की लड़ी नहीं शिकायतों से अब मैं भरी नहीं मैं जान गयी हूँ पीड़ा की वजहें खुद को प्रेम को और तुम्हें पहले मन की अभिलाषाएँ थी मोहवश अपेक्षाएँ थी एक सहज इंसानी जिजिविशाएँ थी