Posts

Showing posts with the label HINDI POST

प्रेम ही इस विश्व ब्रह्माण्ड की शक्ति है

प्रेम ही इस विश्व ब्रह्माण्ड की शक्ति है प्रेम ही ब्रह्माण्ड की भाषा है प्रेम सूरज की रोशनी है प्रेम ही सर्वोत्तम अनुभूति है आप प्रेम हैं, मैं प्रेम हूँ ईश्वर विशुद्ध प्रेम हैं   प्रेम आपको सम्पूर्ण बना देता है प्रेम आपको सबसे जोड़ता है प्रेम से शांति मिलती है प्रेम से सम्पन्नता आती है इस संसार में प्रेम का एहसास सबसे खूबसूरत चीज है और पूर्णतया प्रेम बन जाना आत्मा का अंतिम ध्येय है आपको प्रेम में तकलीफ क्यों होती है आपकी पीड़ा का कारण प्रेम है या आपकी अपेक्षाएँ ? प्रेम एक खास अनुभव है प्रेम वह व्यक्ति नहीं है जिसके साथ हमारा प्रेम का रिश्ता होता है अक्सर रिश्तों में इन्सान वही रहते हैं और प्रेम का एहसास खत्म हो जाता है | अगर आपके साथ कोई बुरा व्यव्हार करता है इसका मतलब वह उसका बर्ताव है आपका स्वाभाव नहीं | जिस दुनिया को आप देखते हैं, वह पूर्ण सत्य नहीं है अपने भीतर भी देखें उधर एक अलग दुनिया है पूर्ण सत्य की दुनिया   प्रेम में लोग करीब क्यों आना चाहते हैं प्रेम सिर्फ जोड़ता है प्रेमियों के तन, मन और आत्मन जुड़ जाते हैं   अहंकार और...

कविता उदास है

आँखों में आँसू का कतरा भी नहीं  जुबान पे अल्फाज की भी कमी नहीं  रंग-ही-रंग बिखड़े पड़े हैं   जिन्दगी के चहुँ ओर हर्ष है, उल्लास है  फिर भी  ये कविता उदास है आसमान में चाँद भी थिरक रहा  दुधिया रोशनी में, मैं सरोबार हूँ  पंखों ने तय कर रखी है  कई मर्तबा दूरियाँ हिम्मत है, मुहब्बत है चाँद को पाने की चाहत भी है  चकोरी बन के भी व्यर्थ ही मेरे हर प्रयास हैं ये कविता उदास है एक तुम्हारा एहसास नहीं  तो छंदों में ताल नहीं  गीतों में बोल है सिर्फ कोई लय नहीं  शब्द तो है, पर भाव नहीं मैं भी हूँ, तुम भी हो  फिर भी  साथ -एक कयास है ये कविता उदास है |   what is spirituality benefits of spiritual practices why people do spiritual practices what are the benefits of spirituality main reason behind spirituality

एक मोड़ पर

एक मोड़ पर एक चेहरा और दो आँखें   यूँ लगा मिल कर लम्हों में सिमटा हो जन्मों का सफर नजरें अपलक,थम गए पहर जैसे जानी पहचानी सी हो डगर आँखों का रंग और उसका संग  ख्वाबों की लहरें, शाम से सहर  डूबो ले गया मुझे प्यार का भँवर होली के रंग ऊँगलियों की छुअन   बेतहाशा धड़कन  हवा में थिरके-से कदम  खोया मेरा मन  बिन उसके एक अधूरापन  फिर रोज एक इंतजार समाना चाहूँ मैं बार-बार  मिलने की ऐसी पागलपन  रोके क्या मुझे दरिया और क्या दीवार आवाज भी उसकी उतरने लगी अन्दर कहीं पहचाने से थे कदमों की आहट भी  ख्वाब और हकीकत दोनों में डेरा उसका मुझपे हर वक्त आँखों का पहरा उसका  पल भर भी दूर होना, नहीं मेरे बस का  बनाई खुदा की नयी तस्वीर मैंने  अक्स दे दिया उसका  कोई और नाम जुबान पर था ही नहीं  जाने क्या गलत क्या सही  इबादत की उस नाम से  जो नाम था उसका एक मोड़ एक मंदिर और एक दुआ लबों पर मुहब्बत का कलमा रिश्ता बस उतना  मैं जोगन वो खुदा मीरा के कृष्ण की तरह  तस्वीर और भजन में झलकता  ऐसे ही कभी अक्षर बन मेरे पन्...

तेरे और मेरे बीच

तेरे और मेरे बीच एक लम्बी सड़क है और कुछ गलियाँ हैं   इमारतें हैं औरखिड़कियाँ हैं   रोज सड़क पर ढूँढती हूँ तुम्हारे कदमों के निशाँ अधखुली खिडकियों में होता है  तुम्हारे होने का भान यूँ तो खिड़की पे कभी तुम दिखे नहीं फिर भी मन की आँखों ने हर दिन तुम्हें देखा है बरसों बीत गए हैं   मुझे इस सड़क पर आते-जाते  यादों की गलियों में जीते-जीते हवा में धुल कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है अब गर्द की परतों में  निशाँ तुम्हारे मिट जाते हैं   सर्दियों का कोहरा भी घना हो रहा है  खिड़कियों ने भी सफेद चादर ओढ़ ली है आँखों पे कितना ही जोर डालूँ   दूर तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है ठिठके कदम हैं मेरे कहीं भाव का ही रिश्ता, था तो सही  तेरे और मेरे बीच  वक्त की कनखियों में  अब सिर्फ बुलबुले उभरते हैं किस्से यूँ ही सिमट जाते हैं   इतिहास के पन्नों में | what is spirituality benefits of spiritual practices why people do spiritual practices what are the benefits of spirituality main reason behind spirituality

मेरे आसमान में

  मेरे आसमान में , जब से तुम चाँद बन के झिलमिलाने लगे हो   मैं उन्मुक्त दरिया बन बहने लगी हूँ   दूर कहीं धरा क्षितिज को मिलते देख   मैं भी आलिंगन के लिए तिरने लगी हूँ मुझमे गहराई भी है और मौजें भी   ध्यान में लीन चित्त की तरह सहेजी है अन्दर कहीं मैंने शांति भी और शीतलता भी   पारदर्शी बूँदों से बना है अंग मेरा तुम्हारी चाँदनी में मोती बन बिखरने लगी हूँ आँखें मेरी तुम पर टिकी हैं राहों के पहाड़ और जंगल दिखते नहीं मुझको   सबको लाँघती हुई , तुम तक आने को हूँ आतुर मौसम की भी परवाह नहीं है मुझको   मैं चंचल बाला-सी अल्हर बनने लगी हूँ मुझमें वेग भी है और आवेग भी मेरी काया निर्मल भी है और निरंतर भी   कण-कण में है निहित संगम की चाह ही   सागर के सीने पर तुम्हारा प्रतिबिम्ब जो जगमगाया   मैं समंदर में समाने लगी हूँ दूर नीले आसमान में अगर गले लगाओ मैं सूरज की अग्नि में तप कर   सफेद बादल बन तुम तक आ जाऊँ मेरी रफ्तार में तुम्हारा ही तो प्यार है   कभी मिलने की उम्मीद में , मैं जीने लगी हूँ | what is spirituality bene...

तुम्हारी कमी में

  अनायास ही कभी तुम बालकनी से झाँक लेते थे लेकिन  शहर बदला जबसे तुमने मैंने सँवरना कम कर दिया है मुहल्ले भर के बच्चों संग  बीच गली, लंगड़ी टांग खेलना अल्हरपन था  या तुम्हारा आने का इंतजार  पिंकी, मुन्नी तो आज भी बुलाती हैं लेकिन अब  मैंने चहकना कम कर दिया है   घूँघरू बाँध लेती थी पैरों में  घर वालों से छुप के  तुम्हारे गीतों के बोल पर अब तो ताल ही नहीं मिलते मैंने थिरकना कम कर दिया है   नींद आज भी नहीं आती है, मुझे जल्दी  खुद से बातें करते-करते  कभी-कभी  कागज के पन्ने रंग डालती हूँ  लबों से अब लफ्ज कम निकलते हैं मैंने बातें करना कम कर दिया है साँसे चलती तो हैं धड़कने भी  जिंदा होने का एहसास तो देती हैं   तुम्हारे बिना लेकिन शायद  मैंने जीना कम कर दिया है | what is spirituality benefits of spiritual practices why people do spiritual practices what are the benefits of spirituality main reason behind spirituality

तुम कौन हो ?

  कृष्ण तुम कौन हो  आसमान का चाँद?  जिसको मैं चकोर बन निहारती हूँ पूर्णिमा की रात को बाँहें फैलाये तुम तक आना चाहती हूँ दूरी कभी तय नहीं कर पाती हूँ सुबह प्राण निकल जाते हैं तुमसे प्यार बयाँ तक नहीं कर पाती हूँ तुम पारस के पत्थर हो क्या? छू कर सोना बना देते हो अपने रंग में रंगने का जादू करते हो दुनिया मुझे आभूषण बना कर सँवर जाती है हार की चमक पर इतराती है कभी तुम्हारे हृदय पर भी चमकूँ मेरी बाँहों का हार तुम्हारे गले हो ऐसी किस्मत मैं कहाँ पाती हूँ ! तुम दरिया हो क्या? आँचल में समेटती हूँ तुम्हें   दिल में छिपा लेना चाहती हूँ और बूँद-बूँद शब्द बन कर  आँचल से छन-छन कर कागज पर एहसास बन टपकने लगते हो ऊँगलियाँ तुम्हें छूने कागज को टटोलती है तुम्हारे किसी आकार को कहाँ महसूस कर पाती हूँ तुम दीप हो क्या? मेरी अँधेरे रास्तों में राह दिखाने के लिए चमकने लगते हो दुनियादारी की उलझनें कम हो जाती हैं तथा कथित मंजिल मिल जाती है तुम्हारी रोशनी में तुमको ढूँढती हूँ हर साए को पकड़ने की नाकाम कोशिश करती हूँ लेकिन खाली हाथ ही रह जाती हूँ तुम सच की तलाश हो या रूह की प्यास हो मुझ...

प्यार में रहने दो

टुटा सितारा था आसमाँ में कहीं   और माँगी थी मैंने दुआ  दूर समंदर से मिलना है कहीं मत रोको, मुझे बहने दो  रगों में बस गया है प्यार कहीं   यूँ ही मुझे रहने दो मीठे पानी के सोते जैसा सतत् ही इसे झरने दो सुबह के मधुर ख्वाब जैसा  इसे पलकों में रहने दो मत पूछो मैंने क्या खोया, क्या पाया  पास था ही क्या, खो जाने को  शहर ये धुप की है मुझे बाँहों की छाँव में रहने दो  सावन की बारिश में  इस कागज की कश्ती को गल जाने दो  वजूद मेरा तुममें समा जाये  यूँ ही बंदगी में रहने दो  मत रोको, मुझे इबादत करने से  यूँ ही डूबा रहने दो |   what is spirituality benefits of spiritual practices why people do spiritual practices what are the benefits of spirituality main reason behind spirituality

तुम्हारे रंग में

रंग गई आज फिर तेरे रंग में  पाँव हैं गगन में  संभाला है, तोहफा तुम्हारे एहसासों का  सदियों से मैंने मन में कितनी रातें बीत जाती हैं   यूँ ही, आज भी पलकों में  बात अभी भी वही है,उन झलकों में  छूता है जब प्यार तुम्हारा  पुरानी खिडकियों के झरोखों में तुम्हारी बाँहों के वो घेरे  मेरे मूँदती पलकों पर  गरम साँसों के सवेरे  कायनात ने बाँधे थे धागे  नजरों ने लिए जब फेरे शाम के सोने का पिघलना  तुम्हारी धड़कनों की संगीत की लय में  पागलों की तरह, तुम्हें खुदा बुलाना  तुम्हारे बिन कहीं-न-कहीं चाँद की चकोरी की तरह अधूरी मैं आज भी कहाँ रुक पाती हूँ  कभी जमीन,कभी दरिया,कभी चकोरी  कितने ही नाम और रूप ले  कागज के पन्नों पर, तुमसे आ मिलती हूँ | what is spirituality benefits of spiritual practices why people do spiritual practices what are the benefits of spirituality main reason behind spirituality

आध्यात्मिक लोगों की मुख्य सात विशेषताएँ

आज कल के समय में आध्यात्मिकता के बारे में खूब बातें होती है, एक तरीके से यह शब्द आम बोल चाल की शब्दावली में सम्मिलित हो गया है | बहुत सारे लोग स्वयं के आध्यात्मिक होने का दावा करते हैं | जो लोग शारीरिक व्यायाम योगाभ्यास करते हैं या कुछ समय किसी के कहने पर आँखें बंद कर ध्यान में बैठ जाते हैं या कुछ पुस्तकें पढ़ लेते हैं, वो लोग भी अपने आपको आध्यात्मिक मानते हैं | हमारे चारों तरफ बहुत सारे शिक्षक हैं, ज्ञान देने वाले विद्वान हैं जो अपने आपको उच्च स्तर पर मानते हैं | आध्यात्मिकता पर बहुत सारी किताबें पढ़ लेने से लोगों को प्रक्रियायों, शब्दों, नियमों का ज्ञान हो जाता है | कुछ विशेष साधनाएँ करने पर कुछ लोग सिद्धि भी प्राप्त कर लेते हैं, ऐसे सभी लोग आध्यात्मिक समझे जाते हैं | वास्तव में आध्यात्मिकता सिर्फ बातों के बारे में नहीं हैं | यह दिखावा भी नहीं होता है | और इसकी गहराई को नापने के लिए हमारे पास कोई पैमाना उपलब्ध नहीं है | हाँ, कोई विशिष्ट उच्च श्रेणी के अगर गुरु के सान्निध्य में जाएँ, तब उनसे कुछ छुपा नहीं रहता है | उनकी आंतरिक दृष्टि सब कुछ माप लेती है, लेकिन ऐसे गुरु का मिलना थोड़ा मुश्...